“ईश्वर के धर्म को स्पंदित करने वाला मुख्य उद्देश्य है मानवजाति के हितों की रक्षा और उसकी एकता को बढ़ावा देना, तथा लोगों के बीच प्रेम और बंधुता की भावना को प्रोत्साहित करना।”


बहाउल्लाह
 
 
 
 

पूरे विश्व में – शहरों, गाँवों और महानगरों में – लाखों बहाई ऐसे समुदायों के निर्माण के लिए प्रयासरत हैं जो आध्यात्मिक और भौतिक रूप से समृद्ध हों। उन सभी लोगों से हाथ मिलाते हुए जिनके मन में एक बेहतर संसार के निर्माण की अभिलाषा है, वे उपासना और सेवा पर केन्द्रित कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से एक नई सभ्यता की बुनियाद डालने के लिए परिश्रम कर रहे हैं। बहाई धर्म – जो दुनिया का सबसे नया धर्म है – के अनुयायियों के लिए ये प्रयास एक विशाल वैश्विक अभियान के अंग हैं जिसका केन्द्रीय उद्देश्य है मानवजाति का आध्यात्मिक और भौतिक एकीकरण।

भारत के बहाई सभी ज्ञात पृष्ठभूमियों से आते हैं – अंदमान के जंगलों से लेकर मुम्बई की अट्टालिकाओं से, तमिलनाडु के समुद्रतटीय इलाके से लेकर सिक्किम जैसे पर्वतीय क्षेत्रों तक से। सामूहिक उपासना के लिए बैठकों, बच्चों, किशोरों और वयस्कों की आध्यात्मिक शिक्षा की कक्षाओं के लिए अपने घरों के द्वार खोलते हुए, विविध प्रकार के परिवेशों में रहने वाले अपने आस-पास के निवासियों के साथ सहयोग करते हुए वे एक ऐसे सामुदायिक जीवन का ताना-बाना बुनने में लीन हैं जिसकी विशेषता है एकता, न्याय और सबके कल्याण के प्रति समर्पण।

एक विशाल, पुरातन एवं विविधता के राष्ट्र के रूप में जब भारत पूरी भव्यता के साथ इक्कीसवीं सदी की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है, उसके सम्मुख नए क्षितिज खुलने लगे हैं। यह भविष्य जिन अवसरों और चुनौतियों को प्रस्तुत करने वाला है उनके लिए ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों की जरूरत है जो एक जटिल और एक-दूसरे से अत्यंत जुड़े हुए इस विश्व में आध्यात्मिक परिपक्वता और बौद्धिक क्षमता के नए स्तरों से सम्पन्न हों।

भारत का बहाई समुदाय क्षमता-निर्माण और सीखने की प्रक्रियाओं के प्रति गहन रूप से समर्पित है, जिससे देश के जनसाधारण को वह आध्यात्मिक अंतर्दृष्टियाँ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्राप्त हो सकें, जिसकी न्याय और एकता पर आधारित संसार के निर्माण के लिए आवश्यकता है।