“युवावस्था की विशेषता है उसकी शक्ति और ऊर्जा। यह मानव जीवन का सबसे उत्तम समय है। इसलिए तुम्हें दिन-रात यह प्रयास करना चाहिए कि तुम स्वर्गिक शक्ति से सम्पन्न, प्रखर इरादों से प्रेरित हो सको और उस प्रभु की स्वर्गिक शक्ति, कृपा और संपुष्टि पा सको।”



अब्दुल-बहा

बहाई समुदाय युवावस्था को किसी भी व्यक्ति के जीवन में एक विशेष अवधि मानता है जो कि मानव-जीवन में बसन्त ऋतु की तरह है। यदि इन युवाओं की उभरती हुई बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं शारीरिक क्षमताओं को इस अवस्था में सामाजिक रूपांतरण की दिशा में मोड़ा जाए तो समुदाय और स्वयं युवा दोनों ही अपनी सच्ची क्षमता को पहचान सकेंगे। 11 से 14 वर्ष तक की किशोरावस्था का समय – जो कि जीवन में तेजी से होने वाले परिवर्तन की अवधि है – वह अवधि है जब ये किशोर उम्र के लोग बचपन की दहलीज छोड़कर प्रौढ़ता की ओर अग्रसर हो रहे होते हैं। नवयुवा अथवा किशोर कहे जाने वाले इस आयुवर्ग के मन में कई सवाल होते हैं, कई अभिलाषाएं होती हैं। हालांकि इस आयुवर्ग के बच्चों को अक्सर एक समस्या मान लिया जाता है और उनका वर्णन नकारात्मक रूप से किया जाता है, लेकिन किशोर कार्यक्रम इस बोध पर आधारित है कि उनमें परोपकार, ब्रह्मांड के बारे में जानने-समझने की उत्सुकता, न्याय की तीव्र भावना और संसार को बेहतर बनाने के लिए काम करने की ललक जैसे गुण होते हैं। चुनौतियों और संभावनाओं से भरी इस अवस्था में इस आयुवर्ग के लोगों को सहायता देने के लिए, बहाई समुदाय द्वारा पूरे विश्व में आध्यात्मिक सशक्तीकरण का एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है।

इस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, 15 साल और इससे अधिक उम्र के युवाओं को ’एनीमेटर्स’ (अनुप्रेरकों) के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है जो अपने-अपने स्थानीय समुदाय क्षेत्रों में किशोरों के छोटे-छोटे समूहों का साथ देते हैं। अपने अनुप्रेरक की सहायता से, ये किशोर अपने मनो-मस्तिष्क में उठने वाले गहन सवालों की खोजबीन करते हैं। वे ऐसी सामग्रियों का अध्ययन करते हैं जो आध्यात्मिक बोध और निर्णय लेने के लिए नैतिक मानदंड से सम्पन्न होने में उनकी मदद करती हैं। ये सामग्रियां उनकी अभिव्यक्ति-क्षमता के सकारात्मक विकास में भी सहायक होती हैं और अपनी प्रचुर ऊर्जा को अपने समुदायों की सेवा में लगाने की क्षमता प्रदान करती हैं। यह कार्यक्रम उन्हें यथार्थ की खोज की जिस प्रक्रिया में संलग्न करता है उससे उन्हें समाज में सक्रिय रचनात्मक एवं ध्वंसात्मक ताकतों के विश्लेषण में भी मदद मिलती है। उन्हें उन ताकतों से बचने में सहायता मिलती है जो एक नेक इन्सान के रूप में अपनी सच्ची पहचान बनाने से उन्हें रोकती हैं। सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए उनके प्रयासों को समरेखित किया जाता है। ऐसे हजारों युवाओं की सहायता से जो अपने खाली समय में अनुप्रेरक के रूप में अपनी स्वयंसेवा दे रहे होते हैं, वर्तमान समय में भारत में हजारों-हजार किशोर ऐसे समूहों में भाग ले रहे हैं।

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