कोलकाता सर्वधर्म सभा ने धर्म की एकजुट करने वाली भूमिका पर दिया जोर

The Booton my neck 3

कोलकाता के बहाई भवन में 13 सितंबर को “धार्मिक दृष्टिकोण से मानवता के प्रति प्रेम और सेवा” विषय पर एक अंतर-धार्मिक गोलमेज बैठक का आयोजन किया गया। इस सभा ने बहाई, ईसाई, हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन और ब्रह्माकुमारी धर्मों के प्रतिनिधियों—साथ ही शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों—को एक ऐसे युग में प्रेम, एकता और सेवा को बढ़ावा देने में धर्म की भूमिका पर विचार करने के लिए एक मंच प्रदान किया, जो अक्सर संघर्षों और भौतिक चाहतों से प्रभावित रहता है।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि धर्म का सार कर्मकांडों में नहीं, बल्कि मानवता के प्रति करुणा और सेवा के कार्यों में निहित है। महामारी के दौरान राहत कार्यों के व्यक्तिगत अनुभव, वंचित बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल चलाने और अंतर-धार्मिक सद्भाव के अनुभवों को व्यावहारिक धर्म के उदाहरणों के रूप में साझा किया गया। हिंदू दृष्टिकोण ने मानवता को सर्वोच्च धर्म के रूप में रेखांकित किया, जबकि सिख और जैन वक्ताओं ने अपने विचारों को शुद्ध करने और सत्य की बहुआयामी प्रकृति (अनेकांतवाद) को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बहाई समुदाय के योगदान में इस बात पर जोर दिया गया कि धर्म का उद्देश्य एकता है, और बहाउल्लाह के इन शब्दों को उद्धृत किया गया: “एकता का प्रकाश इतना शक्तिशाली है कि यह पूरी पृथ्वी को प्रदीप्त कर सकता है।” ईसाई और मुस्लिम प्रतिनिधियों ने भी धर्म में कट्टरपंथ को दूर करने और इसके बजाय सेवा, सम्मान व सहयोग के माध्यम से दिव्य शिक्षाओं को जीने की आवश्यकता को दोहराया।

इसके बाद हुई खुली चर्चा में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, युवा पीढ़ियों के संघर्षों और भौतिक व आध्यात्मिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बात की गई। वक्ताओं ने उल्लेख किया कि ध्यान और आत्म-सुधार के माध्यम से पोषित होने वाला निस्वार्थ प्रेम और आंतरिक परिवर्तन, शांत व सेवा-उन्मुख समाजों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। प्रतिभागी इस साझा समझ के साथ विदा हुए कि धर्म को अपने सच्चे रूप में एकता और उपचार की शक्ति बनना चाहिए, जो सभी समुदायों को मतभेदों से ऊपर उठने और मानवता की व्यावहारिक सेवा के माध्यम से प्रेम को साकार करने का आह्वान करता है।