बच्चे, युवा और जलवायु-परिवर्तन: वास्तविकताएं और सीखे गए पाठ

Realities and lessons learned

7 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, भारत के बहाइयों के जनसम्पर्क कार्यालय ने ‘यंग वीमेन्स क्रिश्चन एसोसिएशन’ (YWCA) और ‘इंडिया एलायंस फॉर चाइल्ड राइट्स’ (IACR) के साथ मिलकर “बच्चे, युवा और जलवायु-परिवर्तन: वास्तविकताएं और सीखे गए पाठ” नामक विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन सम्बंधी परिसंवाद के संदर्भ में बच्चों और युवाओं से सम्बंधित सरोकारों और मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करना था। संगोष्ठी के लिए तैयार किए गए आलेख में यह उल्लेख किया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल जलवायु-संकट के कारण इस आयुवर्ग के समक्ष खड़े खतरों को सामने लाना है बल्कि इस महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय-प्रक्रिया और नीति-निर्माण में युवाओं को अपनी बात कहने देने की आवश्यकता पर जोर देना भी। जैसाकि उक्त दस्तावेज़ में कहा गया: “बच्चों और युवाओं में समझ और परिपक्वता का अभाव है उनके बारे में ऐसी अभिभावकीय धारणा के साथ सोचने के बजाय, उनके प्रति एक वयस्क दृष्टिकोण झलकाया जाना चाहिए जिसमें गंभीर मुद्दों को समझने, उन गंभीर मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को साझा करने और समस्या के समाधान के लिए समाज के एक सदस्य के रूप में योगदान देने की जिम्मेदारी उठाने की उनकी क्षमता को मान्यता दी जाए और उसे पोषित किया जाए।”

यह कार्यक्रम उन विचार-विमर्शों की श्रृंखला में पहला था जिन्हें YWCA और IACR के सहयोग से यह कार्यालय बच्चों, युवाओं और जलवायु परिवर्तन विषय पर आगे भी आयोजित करने की योजना रखता है। सत्र के आरंभ को संबोधित करते हुए बहाई जनसम्पर्क कार्यालय की निदेशिका सुश्री नीलाक्षी राजखोवा ने इस बात का उल्लेख किया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने का विचार समाज में बच्चों के कल्याण विषय पर परिसंवाद को आगे बढ़ाने के बारे में तीनों सहयोगी संस्थाओं की सामान्य चिंता से उभर कर प्रकट हुआ।

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता, यूनिसेफ इंडिया की सामाजिक नीति प्रमुख, सुश्री ह्यून ही बान, ने 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन अधिवेशन (COP28) के संदर्भ से एक वैश्विक परिदृश्य प्रस्तुत किया। उस अधिवेशन का एक प्रमुख एजेंडा था विश्व के नेताओं का आह्वान करना कि वे यह सुनिश्चित करें कि जलवायु सम्बंधी विश्वव्यापी नीतियों के निर्माण में बच्चे और युवा केंद्रीय भूमिका निभाएं। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह यूनिसेफ जलवायु परिवर्तन के मूल विषय को विभिन्न कार्यक्षेत्रों में समेकित कर रहा है, जैसे स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, जल और स्वच्छता, बच्चों के संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो बातें बच्चों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाली हैं उनसे सम्बंधित मुख्य निर्णय-प्रक्रियाओं में बच्चों की भागीदारी को अत्यावश्यक समझा जाना चाहिए।

विमर्श के दौरान, पैनल के एक सदस्य ने जलवायु संकट को कम करने सम्बंधी कार्य-योजनाएं तैयार करने में न्याय के महत्व को रेखांकित किया क्योंकि यह संकट जनसंख्या के विभिन्न समूहों और वर्गों को अलग-अलग ढंग से प्रभावित करता है। पैनल के एक अन्य सदस्य ने विकास परियोजनाओं सम्बंधी निर्णय-प्रक्रियाओं में बच्चों और युवाओं को हितधारकों के रूप में देखने और उनके साथ एकजुटता की भावना दर्शाने की आवश्यकता के बारे में कहा। तीसरे वक्ता ने युवाओं और बच्चों को परिवर्तन के सक्रिय एजेंटों के रूप में देखने और ऐसे अंतर-पीढ़ीगत संवाद को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल दिया जो नीति-निर्माताओं के अनुभवों को बच्चों और युवाओं द्वारा जिए गए अनुभवों के साथ जोड़ सके। विषय को आगे बढ़ाते हुए, चौथे पैनलिस्ट ने युवाओं के मन में एक-दूसरे के प्रति विश्वास, प्रेम, करुणा और धार्मिक ग्रंथों में समान विचारों की तलाश करने की प्रेरणा देते हुए, परामर्श के खुले और ग्रहणशील अवसरों के सृजन की आवश्यकता की ओर ध्यान दिलाया।